जाने क्या चाहती हूॅ मैं जिन्दगी से
जाने चाहती क्या है जिन्दगी मुझसे
दबा कुछ तो है, दोनो ही के लव पे
क्यूं नही झांक पाते एक दूजे के दिल मे..
हमराज क्यूं ना तू मुझे अपना बना ले
आ कुछ पल गुफ्तगूं के चुरा लें
जहॅा को भूल एक दूजे से नजरे मिला लें
अलविदा से पहले आ अब सब कह डाले...
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