रात भर तेज़ बारिश का शोर था
इक ख़ाली बोतल पे पड़ती बूंदो की गूंज
मेरे अंदर के सन्नाटे को तंग करती रही
कोशिश करता सोने की, फिर उठ जाता
कभी यहाँ ढूंढा, कभी वहां
…हैरान था, कुछ न मिला,
अचानक खिड़की के पास ट्रैफिक की रौशनी से कुछ चमका,
इक कांच की बोतल पर नज़र पड़ी, ख़ाली बोतल
जो बार-बार जमीं पर हिलती-डुलती रही, शोर करती रही
शायद वो किसी शराबी के दिल का शोर था
जो वो ख़ाली बोतल सुना रही थी, अपनी गूंज से
रात भर, टका-टक, बिना रुके, टर्र-टर्र, टर्र-टर्र…
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