पूछे दिल मेरा ये ज़वाल क्यूं
दूं मैं खुद से उसको निकाल क्यूं
है दिल की फिर वो ही जुस्तुजू
ना हो दिल का फिर वोही हाल क्यूं
तू जो खुद हुआ ना माँ बाप का
होगा फिर तेरा कोई ऐतफ़ाल क्यूं
मैने बस सुनाई ही थी दास्तान
तेरे अश्क़ हुए इतने बेहाल क्यूं
बड़ी हैरत रक़ीबों को है बरबर
पामाल दिल-ए-मुज़्तर बहाल क्यूं
यूं करता तो दिल मगर पूछे
मैं करूं तेरा अब ख़याल क्यूं
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